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Sunday, 30 May 2021

कोरोना संक्रमण- नागरिक डाट कॉम

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने हिन्दू हृदय सम्राट 'नरेंद्र मोदी' की छवि को तार-तार कर दिया है। क्या मोदी!, क्या शाह!, क्या योगी! सभी बेशर्मी का लबादा ओढ़े हुए हैं। इस बेशर्मी के आवरण में भी, तार-तार होती छवि की चिंता, बेचैनी और घबराहट को, इनके चेहरे पर साफ-साफ पढ़ा जा सकता है।

एक तरफ किसान सड़कों पर हैं, दूसरी तरफ विपक्ष लगातार हमलावर है। तीसरी तरफ आम नागरिक सहित खास भी इलाज, ऑक्सीजन, अस्पतालों की कमी के चलते दर-दर भटककर, तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं।

विपक्ष मोदी से, सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहा है और विपक्ष की यह मांग जायज भी है कि देश में सभी आम नागरिकों का फ्री वैक्सीनेशन करवाया जाए; कि नरेंद्र मोदी के दिमाग में नई संसद, राष्ट्रपति भवन आदि बनाने का जो भूत सवार है जो सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के नाम से कुख्यात हो चुका है, जिसमें 20 हज़ार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होना है, उस भूत से मोदी अपना पिंड छुड़ाएं और इस भारी भरकम राशि को आम नागरिकों के वैक्सीनेशन के लिए, अस्पतालों, ऑक्सीजन, डॉक्टर आदि की व्यवस्था के लिए खर्च करें, कुल मिलाकर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को रद्द करें। 

मगर मोदी और इनकी मित्र मंडली को, जो कि रोज-रोज होती सैकड़ों मौतों (वास्तव में हत्याओं) के लिए जिम्मेदार हैं, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में आलोचना पर मोदी की टीम और इनके विदेश मंत्री बिफर पड़ते हैं।

इन्हें आदत है, हज़ारों मौतों के बीच भी कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए, जश्न मनाने की। यही इनका इतिहास है। गुजरात ने इसे देखा है। दंगों को आयोजित करने और उसमें नरसंहार रचने की, जिनकी आदत हो, वही रोज़ सैकड़ों लोगों की तड़प-तड़प कर होती मौतों के बीच, कह सकते हैं कि माहौल में विपक्षी और विरोधी 'नकारात्मकता' परोस रहे हैं, कि माहौल तो 'सकारात्मक' है।

आम नागरिकों के लिए ऑक्सीजन की मांग करना, अस्पतालों की मांग करना, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट जिसके प्रति मोदी की असीम मोहब्बत है, को रद्द करने की मांग करना, क्या माहौल को 'नकारात्मक' बनाना है! क्या फ्री वैक्सीनेशन की मांग करना 'नकारात्मकता फैलाना' है।

विपक्ष ने अपनी बारी में क्या किया और क्या नहीं किया या वे सत्ता पर होते, तो क्या करते। सवाल यह नहीं है क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही तो शासक हैं, शासक वर्ग के लोग हैं। असल सवाल तो आम नागरिकों का है। 

मोदी सरकार, इस मौके पर, गिद्ध की तरह, आम इंसानों को नोच लेने के मौके, देशी-विदेशी कंपनियों को दे रही है। वैक्सीन कंपनियां, दवा कंपनियां, ऑक्सीजन आदि-आदि के धंधे में लगी कंपनियां इस 'आपदा में अवसर' की तलाश नहीं करेंगी तो क्या करेंगी। 'आपदा में अवसर' मोदी का प्रिय नारा है।

अहंकार और उन्माद में ग्रस्त हिन्दू फासीवादी, वस्तुस्थिति को देख सकने की स्थिति में हैं ही नहीं। इन्होंने रेत में शुतुरमुर्ग की तरह ही गर्दन डाली हुई है। इन्हें लगता है ये 50 साल तक राज करेंगे और जनता को मूर्ख बनाने में सफल होंगे। बस विपक्षी और विरोधी शांत हो जायें तो कोई दिक्कत नहीं। यही फासीवादियों की मानसिक बनावट भी है। इसीलिए उन्होंने, हर उस चीज, जिसमें सत्य है, जिसमें मोदी का महिमामंडन नहीं है, जिसमें मोदी सरकार की नीतियों, उपायों और व्यवहार पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हों; उन्हें झुठलाने का अभियान चला दिया है।

संघ परिवार और मोदी सरकार का यह अभियान है 'सकारात्मकता असीमित'। 'सकारात्मकता असीमित' का यह अभियान उसी तरह शुरू हो रहा है जैसे किसानों के खिलाफ, तीन कृषि कानूनों को किसानों को तमाम दुख-संकटों से मुक्त करने वाला बताया जा रहा था। यह अभियान उसी तरह का है जैसे जब नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के विरोध में देशव्यापी विरोध हुआ था। तब ये इसके पक्ष में सकारात्मक बातों का अभियान चला रहे थे। अफसोस कि इनके 'असीम सकारात्मकता' का फिर वही हस्र होना है जैसा अभी तक हुआ है।

मूर्ख संघी और मोदी सरकार नहीं समझ सकते कि सकारात्मक और नकारात्मक एक ही सिक्के के दो विरोधी पहलू हैं। दूसरा यह कि मानसिक स्तर पर सकारात्मकता और नकारात्मकता का विज्ञान से, वैज्ञानिक तथ्यों, तार्किक सोच और वस्तुगत होने से संबंध है। अंधविश्वास, ढोंग, पाखण्ड से सकारात्मकता नहीं आती। गोमूत्र, हवन, गोबर से कोरोना के इलाज जैसी फर्जी व अवैज्ञानिक बातों से सकारात्मकता नहीं आती।

वैज्ञानिक तथ्यों, तर्कों और वस्तुगत स्थिति (सही-सही स्थिति और बातों) की जितनी जानकारी होगी, उतनी ही सकारात्मकता भी रहेगी या होगी अन्यथा इसका उल्टा ही होगा। भले ही तात्कालिक तौर पर ऐसा न लगे। जैसे जन्म होना और मरना, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जन्म ही नहीं तो फिर मरने का भी सवाल नहीं। कोई जन्म को तो सत्य माने और मरने को झूठ, तो फिर इससे सकारात्मकता नहीं पैदा होती।

मगर, मोदी सरकार और संघ परिवार, इस द्वंद्व को समझ नहीं सकते। सटीक तथ्यों, सटीक आंकड़ों से, वैज्ञानिक चिंतन-तर्कों व तथ्यों से हिन्दू फासीवादियों को सख्त नफरत है। इसीलिए बेरोजगारी के आंकड़े की व्यवस्था खत्म करके, वे बेरोजगारों को 'नकारात्मक' होने से बचाना चाहते हैं। वे कोरोना जांचों की संख्या घटाकर, ज्यादा एंटीजन टेस्ट करवाकर और ऑक्सीजन के मसले पर राज्यों के साथ आंकड़ों का खेल खेलकर पूरे समाज में ''सकारात्मकता'' का माहौल बनाना चाहते हैं। 

मगर अफसोस कि यह कुछ भी काम नहीं आने वाला! पिछले साल के 'थाली-ताली' बजाने और 'दिए जलाने' का हस्र, आज हमारे सामने है। इन मूर्खतापूर्ण कृत्यों का ही नतीजा आज की त्रासदी के रूप में सामने है। इस प्रकार यह 'मोदी निर्मित त्रासदी' भी है। जितनी जल्दी आम नागरिक इस स्थिति को समझ जाएंगे, जितनी जल्दी उनका संघर्ष इस घोर जन विरोधी सरकार के खिलाफ शुरू हो जाएगा, उतना ही और उतनी ही जल्दी समाज सकारात्मकता की ओर बढ़ जाएगा। 

- नागरिक डाट कॉम से साभार

Monday, 3 May 2021

पूंजीवाद को लोगों के जीवन की तनिक भी परवाह नहीं, पूंजीपतियों के लिए अधिकतम मुनाफा बटोरना ही इसका काम

कोरोना

एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) महासचिव श्री प्रभास घोष ने आज 16 अप्रैल 2021 को निम्नलिखित प्रेस बयान जारी किया हैः

''हम अभी कोविड-19 की दूसरी लहर की चपेट में हैं, जो पहली के मुकाबले काफी ज्यादा गंभीर है और जो हजारों लोगों की जानें ले रहा है। लेकिन परिस्थिति इतनी भयावह होने के बावजूद न तो भाजपा नेतृत्ववाली केन्द्र सरकार और न ही तमाम राज्य सरकारें इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ कर रही हैं। पिछले साल जब इस महामारी के प्रकोप ने कई लाख लोगों का जीवन छीन लिया था और करोड़ों आम लोगों के जीवन में घोर आर्थिक बदहाली लाया था, तब यह दयनीय ढंग से पता चला था कि अब तक सरकार द्वारा महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रति बरती गयी आपराधिक लापरवाही की वजह से देश में पर्याप्त संख्या में अस्पतालों, अस्पताल के बेडों, वेंटिलेटरों, ऑक्सीजन सिलेंडरों, डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य कर्मियों और आवश्यक दवाओं की घोर कमी है। क्या यह गंभीरता का मजाक नहीं है कि जब देश टीकों की घोर कमी का सामना कर रहा है, तो पिछले साल के ताली-थाली बजाने, मिट्टी के दीपक और टॉर्च जलाने तथा मिलिट्री के हेलीकप्टरों द्वारा फूल बरसाने की तर्ज पर प्रधानमंत्री 'टीका उत्सव' मना रहे हैं? अगर लोगों की बेशकीमती जिन्दगियों के प्रति सरकार की तनिक भी चिंता होती, तो वह इस कमी को दूर कर सकती थी, क्योंकि दूसरे उछाल से पहले ऐसा करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त समय था। स्वास्थ्य बजट अभी भी बहुत कम है, जबकि एकाधिकार घरानों को दी जा रही तरह-तरह की आर्थिक रियायतों में बढ़ोतरी जारी है। सैन्य और प्रशासनिक खर्चों में लगातार इजाफा हो रहा है। एक ओर, भव्य महल के तौर पर नये संसद भवन के निर्माण, आस-पास के क्षेत्रें के सजावट तथा प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों पर अत्यधिक खर्च में हजारों करोड़ रुपये व्यय किये जा रहे हैं, तो दूसरी ओर, हजारों बेेबस गरीब लोग इलाज के लिए हाहाकार कर रहे हैं और अक्सर इलाज से वंचित होकर मर रहे हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री ने अपने कार्यालय का इस्तेमाल करते हुए 'पीएम केयर फंड' में विशाल राशि इकट्ठी की थी। किसी को पता नहीं है कि इस मद में कितनी राशि इकट्ठी हुई और किसके देखभाल के लिए उस राशि का इस्तेमाल हो रहा है। यह सभी रहस्य बना हुआ है।

क्या हिन्दुत्व के इन पुरोधाओं में कोई मानवीय भावना है? जब दूसरी बार घातक कोरोना महामारी जंगल में आग की तरह फैल रही है; तब प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और भाजपा के अन्य मंत्री तथा उसके अन्य शीर्ष नेता चल रहे विधानसभा चुनावों में ऐन-केन-प्रकारेण जीत दर्ज कर सत्ता पर काबिज होने के एकमात्र मकसद से चुनाव अभियान में दिन-रात व्यस्त हैं, मतदाताओं को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं और स्वास्थ्य संबंधी हिदायतों को धता बताकर बड़ी तादाद में लोगों का जमावड़ा कर रहे हैं।

अन्य तमाम पूंजीवादी-साम्राज्यवादी देशों में भी यही भयावह नजारा है। यह पूंजीवाद का क्रूर अमानवीय चेहरा है, जो लोगों के जीवन की तनिक भी परवाह नहीं करता, बल्कि सिर्फ पूंजीपति वर्ग के लिए अधिकतम मुनाफा बटोरने का काम करता है। इसलिए, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि जब कोविड-19 और भुखमरी की वजह से रोजाना लाखों लोग मर रहे हैं, तो एकाधिकार पूंजीपति और विशाल बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अकूत मुनाफा बटोर रही हैं और अपने धन-सम्पदा में कई गुना बढ़ोतरी कर रही हैं। इसके अलावा, जब दुनिया भर में मानवता ऐसे अभूतपूर्व स्वास्थ्य संकट और उसके साथ आनेवाली आर्थिक बर्बादी का सामना कर रही है, तो पूंजीवादी-साम्राज्यवादी देशों के शासक मानव जाति को इस आपदा से बचाने के लिए अपने तमाम संसाधनों को इकट्ठा करते हुए इस घातक वायरस के खिलाफ एकजुट लड़ाई लड़ने की बजाय अपने संबंधित प्रभाव क्षेत्रों को बढ़ाने और क्षेत्रीय वर्चस्व को मजबूत करने के उद्देश्य से अनैतिक व्यापार युद्ध, सैन्य बजट में अत्यधिक इजाफा और स्थानीय तथा सीमा युद्धों को भड़काने में उलझे हुए हैं। यह एक बार फिर पूंजीवाद के राक्षसी अमानवीय चरित्र को उजागर करता है। अधिकतम मुनाफा ही पूंजीपतियों-साम्राज्यवादियों के लिए सब कुछ है और आम लोगों के जीवन से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।

यह समय की अत्यंत आवश्यकता है कि इस भयानक स्थिति से निपटने हेतु शीघ्र उपयुक्त कदम उठाने के लिए अपने-अपने देशों के साम्राज्यवादी-पूंजीवादी शासकों को मजबूर करने और अंततः भारत सहित सभी देशों में पूंजीवाद विरोधी समाजवादी क्रांति की प्रक्रिया तेज करने के लिए उनके खिलाफ गंभीरतापूर्वक लोगों का एकजुट सुसंगठित संघर्ष प्रारंभ किया जाये।"

Thursday, 29 April 2021

गोबर पट्टी के ग्रामीण इलाकों में सरकारी गुबरैले और कोरोना का अकथ कहर


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उत्तर प्रदेश और बिहार के गांवों में भी कोरोना ने अपने काले जबड़े चारों तरफ भयंकर रूप से फैला लिया है | लेकिन इसकी नोटिस  ना तो  धंधेबाज मीडिया ले रही है  न ही  इस विषय पर उल्लेखनीय रंग से सोशल मीडिया में बात हो रही है| ग्रामीण  इलाकों में ऐसा कोई गांव या घर नहीं बचा है  जहां लोग बीमार ना हुए हो |लोग बीमार हो रहे हैं , ज्यादातर ठीक हो रहे हैं  लेकिन मृत्यु भी काफी संख्या में हुई है |उनके पास दवा के लिए सिर्फ झोलाछाप डॉक्टर हैं | ग्रामीणों की रोग प्रतिरोधक  क्षमता  शहरी लोगों की अपेक्षा अधिक है | वहीं सर्वसाधारण लोगों में  भय नहीं है  | उन्हें यह भी पता नहीं कि उन्हें कोरोना हुआ है या कोई अन्य बीमारी |  लेकिन अधिकांश लोगों की घ्राण शक्ति और स्वाद शक्ति  खत्म हो जाने के लक्षण मिले हैं | खांसी बुखार सर दर्द उसके बाद ठीक हो जाने पर भी बहुत कमजोरी  सारे के सारे लक्षण कोरोना के  |बहुत कम लोग टेस्ट करा पा रहे हैं| टेस्ट कराने पर वह कॉविड पॉजिटिव भी निकल रहे हैं |लेकिन बहुत सारी मृत्यु भी हो रही है ,जिसकी कहीं नोटिस न तो सोशल मीडिया ले रहा है और न ही  धंधेबाज मीडिया | लोग राम भरोसे ठीक हो रहे हैं और राम भरोसे मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं | उदाहरण के लिए आपको बता दूं इलाहाबाद के फूलपुर तहसील में एक छोटे से गांव कनौजा में कम से कम 6 आदमी मरे हैं गांव के सारे के सारे लोग बीमार हुए हैं| पूरे उत्तर प्रदेश और बिहार में सरकारी स्वास्थ्य मशीनरी ग्रामीण इलाकों में लगभग शून्य के बराबर कार्यरत है | ना तो इस व्यवस्था को इसकी चिंता है न हीं वह कुछ कर ही रही है | जनता ने जो चुना वही उसे रिटर्न वापस मिल रहा है | स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के बारे में बात करना भी यहां गुनाह और अपराध है |ऑक्सीजन की कमी ,दवाओं की कमी के बारे में कहना  सरकार से दुश्मनी मोल लेने और देशद्रोह के बराबर है | शहरों के बारे में तो सबको पता ही है | ना कहीं ऑक्सीजन मिल रहा है न कहीं बेड मिल रहा है ना वेंटीलेटर |  यहां तक कि मेडिकल स्टोर से दवाइयां तक खत्म हो गई हैं  ?ऐसे क्यों हो रहा है | इसके पीछे जो षड्यंत्र है क्या उसका पर्दाफाश नहीं होना चाहिए | सरकार की अक्षमता और लापरवाही पर  प्रश्न नहीं उठने चाहिए |इस सब की जिम्मेदारी सरकार की है या अदृश्य ईश्वर की ? 
           लेकिन इतनी सारी मृत्यु और त्रासदी के बाद भी क्या जनता के अंदर चेतना विकसित होगी? उसकी प्राथमिकता स्वास्थ्य रोजगार होगी या फिर वही जाति पांत और सांप्रदायिकता ? भक्त / अभक्त सभी मर रहे हैं | क्या भक्तों की भक्ति छूट जाएगी या यह नशा लाइलाज है ? क्या जंगली गंजेड़ी गांजा पीता रहेगा और जनता उसके नथुने से निकले हुए धुयें को सिर्फ सोंटती रहेगी ? भीड़ भरे  मंचों पर खेला दिखाने वाला मदारी अब मृत्यु का खेला दिखा रहा है | इसे कौन रोकेगा ?

##जुल्मीरामसिंह यादव

कोरोना - ओम प्रकाश रमन

शासकों की अक्षमता,अयोग्यता और जनसामान्य के प्रति पूर्ण उपेक्षा के चलते क़हर बने कोरोना से जनता जो दुःख,यंत्रणा और पीड़ा भोग रही है; निरीहता,क्रंदन और बदहवासी का जो आलम है; ऐसे में इस दुष्ट और पाखंडी शासन के प्रधान को इस भयंकर आफ़त की सारी ज़िम्मेवारी से बचाते हुए इसका चेहरा चमकाने में लगे इसके भांड़ पत्रकारों और इस पिशाच को पाक-साफ़ साबित करने में दिन-रात लिप्त फ़ासिस्ट आइ० टी० सेल में सोद्देश्य उत्पादित ऊलजलूल तर्कहीन जनद्रोही मेसेजों को धड़ाधड़ फ़ॉर्वर्ड करने में व्यस्त बज्रमूर्खों  को देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई सुअर गू खा रहा है।

हत्यारी पूंजीवादी चिकित्सा व्यवस्था के शिकार हो गए

दुखद! बेहद दुखद! पटना स्थित यूनियन के जुझारू साथी धनंजय के भाई संजय की कोरोना से दुखद मौत। हालत बिगड़ने पर वे NMCH अस्पताल लाये गए। लेकिन आक्सीजन की कमी का हवाला दे कर इन्हें यहां भर्ती नही किया गया। पीएमसीएच और एमस में बेड खाली नही था। और अंततः  NMCH अस्पताल  के गेट पर ही अपने परिजनों के सामने ये हत्यारी पूंजीवादी चिकित्सा व्यवस्था के शिकार हो गए।

पिछले कई दशकों से स्वास्थ्य व्यवस्था को निजी कॉर्पोरेट हॉस्पिटल के हाथों जाते हुए और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा को दम तोड़ते हुए हम देख रहे है। कोरोना के बढ़ते कहर ने इसे (सार्वजनिक चिकित्सा व्यवस्था के पतन को) और तेज कर दिया है और स्वास्थ्य व्यवस्था को दुर्दशा के कगार पर पहुंचा दिया है, मिहनतकस जनता के पहुचं से बहुत बाहर। नतीजा हमारे सामने है: आक्सीजन के लिये गुहार लगाते लोग, दवाइयों के लिये तरस्ते तड़पते लोग और अव्यवस्था के सामने दम तोड़ते लोग। एक भयंकर सामाजिक त्रासदी हम पर लाद दिया गया है और हम पूरी तरह विवश है- निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों, राजनीतिज्ञों, न्यायाधीशों, विद्वानों और व्यापारियों के गिद्ध गिरोह के सामने एकदम विवश।

Wednesday, 7 April 2021

कोरोना के लिए घर पर आवश्यक चिकित्सा किट

                          
1. पारासिटामोल ।
2. बीटाडीन गार्गल- माउथवॉश के लिए ।
3. विटामिन 'सी' और 'डी' ।
4. बी कॉम्प्लेक्स ।
5. भाप लेने के लिए भाप पात्र, तपेली । चुटकी भर सैंदा नमक की भाप भी ले सकते हैं ।
6. पल्स ऑक्सीमीटर ।
7. ऑक्सीजन सिलेन्डर *(केवल आपातकाल के लिए) ।*
8. गहरी साँस लेने के व्यायाम करें।

*👉कोरोना के तीन चरण:-*

1. *केवल नाक में कोरोना* -
 
रिकवरी का समय आधा दिन होता है, 
इसमें आमतौर पर बुखार नहीं होता है और इसे *असिम्टोमाटिक* कहते हैं |
इसमें क्या करें :- 
स्टीम इन्हेलिंग करें व विटामिन 'सी' लें | 

2. *गले में खराश* -
 
रिकवरी का समय 1 दिन होता है 
इसमें क्या करें : -
गर्म पानी के गरारे करें, पीने में गर्म पानी लें, 
अगर बुखार हो तो पारासिटामोल लें | 
अगर गंभीर हो तो विटामिन 'सी' , बी.काम्पलेक्स और एंटीबायोटिक लें | 

3. *फेफड़े में खांसी* -

4 से 5 दिन में खांसी और सांस फूलना। 
इसमें क्या करें :--
गर्म पानी के गरारे करें, पीने में गर्म पानी लें, 
विटामिन 'सी' , बी कॉम्प्लेक्स, पारासिटामोल लें और गुनगुने पानी के साथ नींबू का सेवन करें। 
ऑक्सीमीटर से अपने ऑक्सीजन लेबल की जाँच करते रहें | अगर आपके पास ऑक्सीमीटर 
नहीं हो तो आप किसी भी दवा दुकान में काल कर के होम डिलीवरी लें अथवा 
पीएमसीएच में कॉल सकते हैं |
गहरी साँस लेने का व्यायाम करें
अगर समस्या गंभीर हो तो ऑक्सीजन सिलेन्डर मंगाए और डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श लें | 

*अस्पताल जाने के लिए स्टेज:-*

ऑक्सीमीटर से अपने ऑक्सीजन लेवल की जाँच करते रहें । यदि यह 92 ( सामान्य 98 -100 ) के 
पास जाता है और आपको कोरोना के लक्षण
*(जैसे की बुखार, सांस फूलना इत्यादि)* है तो 
आपको ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता होती है। इसके लिए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य सेवा केंद्र पर संपर्क करें व परामर्श लें | 

*स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें !*
 कृपया अपने परिवार और समाज का ख्याल रखें | घर पर रहें और सुरक्षित रहें |

 *ध्यान दें:-*

कोरोना वायरस का pH  5.5 से 8.5 तक होता है ।
इसलिए, वायरस को खत्म करने के लिए हमें बस इतना करना हैं कि वायरस की अम्लता के स्तर से अधिक क्षारीय खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

 *जैसे कि:*

- *केले*
- *हरा नींबू - 9.9 पीएच*
- *पीला नींबू - 8.2 पीएच*
- *एवोकैडो - 15.6 पीएच*
- *लहसुन - 13.2 पीएच*
- *आम - 8.7 पीएच*
- *कीनू - 8.5 पीएच*
- *अनानास - 12.7 पीएच*
- *जलकुंड - 22.7 पीएच*
- *संतरे - 9.2 पीएच*

 *कैसे पता चलेगा कि आप कोरोना वायरस से संक्रमित हैं ?*

 1.  *गला सूखना*
 2. *सूखी खांसी*
 3. *शरीर का उच्च तापमान* 
 4. *सांस की तकलीफ*
 5. *सिर दर्द*
 6. *बदन दर्द*

गर्म पानी के साथ नींबू पीने से वायरस फेफड़ों तक पहुँचने से पहले ही खत्म हो जाते हैं | 

*इस जानकारी को खुद तक न रखें।* 
इसे अपने सभी परिवार और दोस्तों और सभी के साथ शेयर करें । 
आपको नहीं पता की इस जानकारी को शेयर करके आप कितनी जान बचा रहे हैं | 
इसे शेयर करें और लोगों की मदद करें | 
ताकि अधिक से अधिक लोगों को  जानकारी हो सके।

*डॉ.  किंजल जैन*

१९५३ में स्टालिन की शव यात्रा पर उमड़ा सैलाब 

*On this day in 1953, a sea of humanity thronged the streets for Stalin's funeral procession.* Joseph Stalin, the Soviet Union's fea...