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Tuesday, 4 May 2021

मजदूरों की पत्रकारिता

दुनिया में कहीं भी सर्वहारा आन्दोलन का जन्म " यकायक शुद्ध वर्गीय रूप में, बना-बनाया, ज्युपिटर के सर से मिनरवा की भांति नहीं हुआ। केवल सबसे अगुआ मजदूरों, सभी वर्गचेतन मजदूरों के लंबे संघर्ष तथा कठोर श्रम से ही सर्वहारा के वर्गीय आन्दोलन का निर्माण करना, उसे मजबूत बनाना, तमाम निम्न-पूंजीवादी मिलावटों, प्रतिबंधों, संकीर्णता और विकृतियों से मुक्त करना सम्भव था । मजदूर वर्ग निम्न-पूंजीपतियों के साथ जीवन व्यतीत करता है जो, जैसे-जैसे तबाह होता जाता है। सर्वहारा की पंक्ति में बढ़ती हुई संख्या में नये रंगरूट लाता है। और पूंजीवादी देशों में रूस सबसे अधिक निम्न-पूंजीवादी, सबसे अधिक फ़िलिस्टीन देश है जो अब कहीं जाकर पूंजीवादी क्रांतियों के दौर से गुजर रहा है जिससे उदाहरण के लिए, इंगलैंड सतहवीं शताब्दी में, और फ्रांस अठारहवीं तथा शुरू उन्नीसवीं शताब्दियों में गुजर चुका है।

जो वर्गचेतन मजदूर अब एक ऐसे काम से निबट रहे हैं जिससे उन्हें नजदीकी लगाव है और जो उन्हें प्रिय है, याने मजदूर वर्गीय अख़बार चलाने, उसे पक्के आधार पर खड़ा करने और मजबूत बनाने और विकसित करने का काम, वे रूस में मार्क्सवाद तथा सामाजिक-जनवादी पत्रकारिता के बीस बरस के इतिहास को नहीं भूलेंगे।

मजदूरों के आन्दोलन का एक अनुपकार बुद्धिजीवियों में उसके उन साहसहीन मित्रों द्वारा किया जा रहा है जो सामाजिक-जनवादियों के भीतरी संघर्ष से घबराते हैं, और जो शोर-गुल मचाते हैं कि इससे कोई संपर्क नहीं रखना चाहिए। ये भले मानस मगर बेकार लोग हैं, और इनकी चीख पुकार बेकार है।

केवल अवसरवाद के विरुद्ध मार्क्सवाद के संघर्ष के इतिहास का अध्ययन करके ही, केवल इस बात का सम्पूर्ण घोर तफ़सीली अध्ययन करके कि स्वतंत्र सर्वहारा जनवाद ने किस ढंग से निम्न-पूंजीवादी गड़बड़-झाले से छुटकारा पाया, अगुआ मजदूर निर्णायक ढंग से अपनी वर्गीय चेतना और अपनी मजदूरों की पत्रकारिता को प्रबल कर सकते हैं।

●राबोची', अंक १, २२ अप्रैल १९१४

लेनिन, खंड २५, पृष्ठ ६३-१०१

१९५३ में स्टालिन की शव यात्रा पर उमड़ा सैलाब 

*On this day in 1953, a sea of humanity thronged the streets for Stalin's funeral procession.* Joseph Stalin, the Soviet Union's fea...