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Saturday, 13 March 2021

सहजानंद सरस्वती

जहां तिरंगा झंडा राष्ट्रवाद का प्रतीक है, वही लाल झंडा शोषितों और पीड़ितों की अन्तर्राष्ट्रीय एकता और आकांक्षा का प्रतीक है.

इस अंतर्राष्ट्रीयता के युग में, जहां किसान और मजदूर के संघर्ष अंतराष्ट्रीय चरित्र अख्तियार कर चुके है, वहां वे अपन ध्येय अंतर्राष्ट्रीय एकता के बिना हासिल नहीं कर सकते है, अतः इस तरह के प्रतीक (लाल झंडा) अनिवार्य है!

● सहजानंद सरस्वती 

१९५३ में स्टालिन की शव यात्रा पर उमड़ा सैलाब 

*On this day in 1953, a sea of humanity thronged the streets for Stalin's funeral procession.* Joseph Stalin, the Soviet Union's fea...