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Thursday, 21 January 2021

कॉर्पोरेट को पूरी आजादी देता कृषि कानून*


21/01/2021

इन तीन कृषि कानून के आने के बाद कॉर्पोरेट क्लास को पूरी छूट, आजादी मिल गयी है कि वो जिस प्रदेश के किसान से चाहे कृषि उपज खरीद सकते है, जिस कीमत पर जितना चाहे खरीद कर गोदाम भर सकते है क्योंकि अब जमाखोरी से सम्बंधित कानून में आवश्यक संशोधन कर दिया गया है। फिर खरीदी हुई कृषि उपज को बाजार में पूरे देश मे फैले अपने हजारो बड़े-बड़े रिटेल मॉल के माध्यम से जितनी कीमत चाहे वे हमसे वसूल कर सकते है क्योंकि कीमत एक सीमा के अंदर रखने के लिये कानून में कोई प्रावधान नही रखा गया है।
अप्रैल मई में सरसो का न्यूनतम सरकारी मूल्य था 44 रुपए/ किलो और सरसो के तेल का मूल्य था 80 से  90 रुपए लीटर (खुदरा बाजार में)

अभी तो भंडारण की सीमा थी जिसे जून मे खत्म कर दिया गया और सरसो सेठ जी के गोदाम में पहुंच गई!

आज सरसो का रेट है-लगभग 60 से 65/किलो और सरसो का तेल- 160 रुपए/ लीटर !

अर्थात 166 रुपए किलो जिसपर 200 रुपए से अधिक का मूल्य प्रिंट होकर आना शुरू हो गया है! 

यदि किसान आंदोलन तथा अड़ानी अंबानी विरोध न हो रहा होता तो शायद यह प्रिंट रेट पर ही बिकता!!

अभी सरसो की नई फसल आने में तीन महीने बाकी है.

सचमुच, मोदी सरकार के इस दावे में तनिक भी सच्चाई नही है कि यह कानून किसानों के हित  में लाया गया है और इससे किसानों की आमदनी दुगुनी हो जाएगी।  इस कानून ने कॉर्पोरेट घराने को कृषि उपज पर अधिकतम मुनाफा कमाने की पूरी आजादी प्रदान किया है। इसमें किसानों के लिये कुछ भी नही है, किसानों के नाम पर यह  देशी- विदेशी कॉर्पोरेट के पक्ष में बनाया गया कानून  है।

Friday, 8 January 2021

वर्तमान में मजदूर किसान एकता

तीनो कृषि कानून और चार श्रम सहिंताओं के माध्यम से श्रम कानूनों में बदलाव - सिर्फ और सिर्फ  कॉर्पोरेट हितों का पोषण करने वाले है, मजदुरो और किसानों के हितों के खिलाफ है; इस लिये मजदुरो और किसानों को एक प्लेटफॉर्म पर आकर अपने कॉमन दुश्मन कॉरपोरेट्स और उसकी चहेती मोदी सरकार के खिलाफ तीब्र संघर्ष छेड़ना ही होगा। अलग अलग नही, साथ मिल कर पूंजी की सत्ता के खिलाफ मजबूती से उठ खड़ा होना - उनके सामने सिर्फ और सिर्फ एक यही विकल्प है।

हालांकि एमएसपी सिर्फ 6 % किसानों को ही मिल पाता है, फिर भी इसका विरोध IMF और WTO जैसी साम्राज्यवादी संस्थाएं अपने जरखरीद बुद्धिजीवियों द्वारा लम्बे चौड़े रिपोर्ट के माध्यम से यह प्रचारित करवा रही है कि एमएसपी मजदुरो और गरीब किसानों के हित के खिलाफ है और महगंगाई बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। 

एक किसान भाई ने इस पर टिपण्णी की है कि एक लीटर पानी का बोतल और एक किलो गेहू आज बाजार में 20 रुपया में मिलता है। क्या यह माना जाए कि पानी का बोतल एमएसपी नही मिलने के कारण सस्ता है और एमएसपी मिलने के कारण गेहूं महँगा है। क्या इस तरह की घटिया सोच एवम विचारो का प्रचार प्रसार सिर्फ विचारात्मक गलती है, या कॉर्पोरेट और साम्राज्यवादी हितों की खुल्लमखुल्ला और बेशर्म दलाली है ?

१९५३ में स्टालिन की शव यात्रा पर उमड़ा सैलाब 

*On this day in 1953, a sea of humanity thronged the streets for Stalin's funeral procession.* Joseph Stalin, the Soviet Union's fea...