मानव तस्करी भी एक बड़ा मुद्दा है जिसका सामना कई महिलाएं और लड़कियां करती हैं, इनकी तस्करी विभिन्न उद्देश्यों के लिए की जाती है। हर साल शादी के नाम पर या घरेलू सहायिका के रूप में काम करने के लिए या वेश्यावृत्ति के लिए अरब देशों में बड़ी संख्या में महिलाओं और लड़कियों की तस्करी की जाती है। भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपीन, इंडोनेशिया, सूडान, इथियोपिया और कई अन्य देशों की महिलाएं स्वेच्छा से अरब देशों में घरेलू नौकरों या अन्य कम कुशल मजदूरों के रूप में यात्रा करती हैं, लेकिन बाद में गुलामी की स्थितियों में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इनके पासपोर्ट ज़ब्त कर लिए जाते हैं और इनकी वापसी पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, उन्हें धमकियाँ दी जाती हैं, शारीरिक या यौन शोषण किया जाता है और कई मामलों में तो मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जाता।
ईरानी महिलाओं की ईरान में ही वेश्यावृत्ति, जबरन विवाह, कर्ज चुकाने और आय प्रदान करने के लिए भिखारियों या मजदूरों के रूप में काम करने के लिए तस्करी की जाती है, जहां उनको गुलामों जैसी ज़िंदगी बितानी पड़ती है। ईरानी महिलाओं और लड़कियों को व्यावसायिक यौन शोषण के लिए पाकिस्तान, तुर्की, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम भी भेजा जाता है। ईरान के इंटरपोल ब्यूरो के प्रमुख का मानना है कि यौन गुलामी का व्यापार आज ईरान की सबसे अधिक लाभदायक गतिविधियों में से एक है। यह आपराधिक व्यापार सत्तारूढ़ कट्टरपंथियों के ज्ञान और भागीदारी के बिना नहीं किया जाता है। सरकारी अधिकारी खुद महिलाओं और लड़कियों को खरीदने, बेचने और यौन शोषण में लिप्त होते हैं। बाम के भूकंप में अनाथ हुई लड़कियों का अपहरण कर के उन्हें तेहरान के एक जाने-माने दास बाजार में ले जाया गया, जहां ईरानी और विदेशी व्यापारी मिलते हैं। दास व्यापार के शिकारों के लिए सबसे लोकप्रिय गंतव्य फारस की खाड़ी में स्थित अरब देश होते हैं।
घरेलू दासता और व्यावसायिक यौन शोषण के उद्देश्य से तस्करी की गई महिलाओं और बच्चों के लिए सीरिया एक मुख्य गंतव्य देश है। इराक, पूर्वी यूरोप, पूर्व सोवियत राज्यों, सोमालिया और मोरक्को की महिलाओं को कैबरे नर्तकियों के रूप में भर्ती किया जाता है और बाद में उन्हें वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है।
कुछ अरब पुरुष मॉरिटानिया, यमन, इंडोनेशिया या भारत जैसे देशों से "अस्थायी विवाह" जैसे कानूनी अनुबंधों का प्रयोग कर के भी लड़कियों को लाते हैं, जिसकी आड़ में प्रवासी श्रमिकों का यौन शोषण किया जाता है। लड़कियां, जो 7 साल से भी कम उम्र की हो सकती हैं, उन्हें विश्वास दिलाया जाता है कि उनकी शादी ईमानदारी से की जा रही है, लेकिन बाद में सऊदी अरब पहुंचने पर वे अपने पति की यौन गुलाम बन जाती हैं, उनसे घर का काम कराया जाता है और कुछ मामलों में वेश्यावृत्ति के लिए भी मजबूर किया जाता है।
सितंबर 4, 2005 को, "एक नाबालिग लड़की, कई अरब" शीर्षक के तहत टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में मोहम्मद वजीहुद्दीन ने लिखा, "वे नए जोश के साथ आने वाले पुराने शिकारी होते हैं। ये अक्सर दाढ़ी वाले, हमेशा लहराते हुए चोगे और महंगी पगड़ी पहने होते हैं। अमीर, अधेड़ अरब हैदराबाद की ग़रीब बस्तियों में गश्त लगाया करते हैं, जिनकी संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। हमारा यह मानना कि मध्ययुगीन सम्राटों के अपने हरम अब इतिहास की बात हैं। ये वियाग्रा सक्षम अरब शादी के इस्लामी नियम की आड़ में, और निकाह के लिबास में एक ज़बरदस्त अपराध कर रहे हैं। किसी मुस्लिम व्यक्ति को एक समय में चार पत्नियां रखने की अनुमति देने वाले स्वीकृत प्रावधान का दुरुपयोग करते हुए, कई पुराने अरब न केवल हैदराबाद में नाबालिगों से शादी कर रहे हैं, बल्कि एक ही बैठक में एक से अधिक नाबालिगों से शादी कर रहे हैं…..दलाल ने फरहीन सुल्ताना और हिना सुल्ताना, जिनकी आयु क्रमशः 13 से 15 वर्ष की थी, को महज़ बीस हजार रुपये में खरीदा। फिर उन्होंने काजी मोहम्मद अब्दुल वहीद कुरैशी को शादी के लिए नियुक्त किया। क़ाज़ी (एक इस्लामी न्यायाधीश, जिसे आमतौर पर अंग्रेजी में कादी लिखा जाता है) ने इस्लामी प्रावधान का लाभ उठाते हुए लड़की की शादी अरब से कर दी। लड़कियों के साथ सुहागरात मनाने के बाद सुबह होते ही अरब चला गया"।
......जारी
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