पाकिस्तान में हर साल करीब 5000 महिलाएं ऑनर किलिंग की शिकार होती हैं। मिस्र में महिलाओं की मौत पर किए गए एक अध्ययन में पता चला कि बलात्कार की 47 प्रतिशत पीड़ितों को तब अपमान के कारण मार दिया गया था, जबकि बलात्कार उनके परिवारों के अंदर ही हुआ था।
2000 में, संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया था कि हर साल 5000 ऑनर किलिंग होती हैं, लेकिन यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। 2002 में, बांग्लादेश में 315 महिलाओं और लड़कियों ने एसिड हमलों का सामना किया, जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा का एक और रूप है। 2005 में, अपराध के लिए अधिक गंभीर दंड की शुरूआत के बाद भी, 200 से अधिक महिलाओं पर हमला किया गया। फिलिस्तीन में, 2013 के पहले 9 महीनों में 25 ऑनर किलिंग दर्ज की गईं।
ऑनर किलिंग का संबंध नामूस या इज्जत से है, जिसका अर्थ है सम्मान। यदि परिवार की किसी महिला के कारण किसी पुरुष की नामूस पर आंच आती है, तो वह उसे दंडित करके अपने सम्मान को शुद्ध करने का प्रयास कर सकता है। ऐसे चरम मामलों में अंतिम सजा मौत की हो सकती है। किसी महिला के गलत काम करने का केवल शक ही सम्मान के नाम पर उसके प्रति हिंसा के लिए काफी हो सकता है। 2007 में, सऊदी अरब में, एक युवती की उसके पिता द्वारा फेस बुक पर एक पुरुष के साथ चैट करने के कारण हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने मीडिया का खूब ध्यान खींचा था। रूढ़िवादियों ने सरकार से फेस बुक पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया, क्योंकि यह वासना को भड़काता है और लैंगिक मेलजोल को प्रोत्साहित करके समाज में फसाद पैदा कर रहा है।
ऑनर किलिंग के लिए प्रेरणा अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग होती है और विभिन्न संस्कृतियों की सामाजिक और नैतिकता मान्यताओं पर आधारित होती है, जो अक्सर धर्म के ठेकेदारों द्वारा संचालित होती है। अधिकतर ऑनर किलिंग पर शायद ही कभी मुकदमा चलाया जाता है या अगर मुकदमा चलाया भी जाता है तो सज़ा अपेक्षाकृत हल्की होती है। चूंकि ऑनर किलिंग को सम्मान से जोड़ा जाता है, इसलिए इसमें पूरा पारिवार मिल कर सहयोग करता है। इज्ज़त के नाम पर दुनिया भर में दो तिहाई पीड़ितों को अपने ही मूल परिवारों के द्वारा मौत के घाट उतार दिया जाता है। मुस्लिम दुनिया में अपने परिवारों द्वारा हत्या का प्रतिशत सबसे अधिक, लगभग 72% था, जबकि इस तरह के अपराधों के निजी स्वरूप के चलते तथ्य यह है कि ऐसे मामले बहुत कम रिपोर्ट किए जाते हैं, जिस कारण इनके असल आंकड़े जुटाना बेहद मुश्किल है। मध्य पूर्व और दक्षिण पश्चिम एशिया में कई महिला समूह संदेह व्यक्त करते हैं कि पीड़ितों की संख्या संयुक्त राष्ट्र की सालाना 5000 मौतों के आंकड़े का कम से कम चार गुना हो सकता है।
हालांकि भारत में मुसलमानों के बीच ऑनर किलिंग आम नहीं है, लेकिन विश्वसनीय आंकड़ों के अभाव में, वास्तविक निष्कर्ष निकालना मुश्किल है। हाल ही में एक समाचार पत्र ने बताया था कि एक उत्तर भारतीय शहर में दो मुस्लिम महिलाओं को हिंदू पुरुषों के साथ भागकर परिवार का अपमान करने के आरोप में अपनी बेटियों की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
भारत में मुसलमानों और हिंदुओं के बीच शादियां आम नहीं हैं, और ऐसी शादियों पर दोनों समुदायों की पेशानियों पर बल पड़ जाते हैं। भारत भर में शादियाँ परिवारों द्वारा तय की जाती हैं। लेकिन बढ़ती अर्थव्यवस्था और अधिक से अधिक महिलाओं के कार्यक्षेत्र में प्रवेश के साथ ही, प्रेम विवाह ऐसी परंपराओं के बीच से धीरे-धीरे मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। हालाँकि, सदियों पुरानी जातीय और सामुदायिक बाधाएँ अभी भी चलन में हैं, और हाल के वर्षों में पूरे उत्तर भारत में "ऑनर किलिंग" में तेजी आई है।
.........जारी
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