कौन कहता है कि इस देश में आज़ादी नहीं है
सोचता है एक देशभक्त
ट्रैफिक सिग्नल पर अपनी कार में देशभक्ति के गीत सुनते हुए
और गर्व से तिरंगा ख़रीदते हुए
वाक़ई वह आज़ाद है ख़रीदने के लिए
आज़ाद तो वह अधनंगा बच्चा भी है तिरंगा बेचने के लिए
ठीक उसी तरह जिस तरह आज़ाद है उसका पिता
लेबर अड्डों , कारख़ानों और खेतों में
अपनी मेहनत करने की कूव्वत बेचने के लिए
जिस तरह आज़ाद है उसका मालिक
उसकी हड्डियाँ निचोड़ने के लिए
An and Singh

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