क्या तुम्हें लगता है कि जो बाद में मरेगा
ढूँढेगा कि पहले कौन गया ?
मुझे नहीं लगता
अच्छा होगा कि तुम मुझे जलवाना
और मुझे अपने कमरे में स्टोव के ऊपर एक जार में रख देना
जार काँच का बना होगा
पारदर्शी, उजला काँच
ताकि तुम मुझे देख सको उसके अन्दर…
तुम देखो मेरा बलिदान :
मैंने पृथ्वी का हिस्सा हो जाने का मोह छोड़ा
मैंने एक फूल बनकर उगने का मोह छोड़ा
ताकि तुम्हारे साथ रह सकूँ
और मैं धूल बन रहा हूँ
तुम्हारे साथ रहने के लिए
बाद में, जब तुम भी मर जाओगी
तुम मेरे जार में आ जाओगी
और वहाँ हम रहेंगे एक साथ
तुम्हारी राख मेरी राख में मिली हुई,
जब तक कि एक बेपरवाह चिड़िया
या कोई निष्ठाहीन वंशज
हमें वहाँ से बाहर फेंक दे…
लेकिन हम
उस समय तक
मिले रहेंगे एक दूसरे से
इस तरह से
कि जिस कचरे के ढेर में हम फेंके जाएँ
हमारे कण पास-पास गिरें
हम साथ में मिलेंगे मिट्टी में
और एक दिन एक जँगली फूल
उस मिट्टी में पनपेगा और खिलेगा
उसकी आकृति के ऊपर निश्चित ही
दो फूल और होंगे
एक तुम
एक मैं
मैं मृत्यु के बारे में अभी नहीं सोचता
मैं एक बच्चे को जन्म दूँगा
जीवन मुझमें उमड़ रहा है
मेरा रक्त अभी गरम है
मैं जिऊँगा बहुत लम्बी उम्र
तुम्हारे साथ
मुझे मृत्यु नहीं डराती
अपनी अन्तिम यात्रा का तरीक़ा मैं चुनूँगा
बल्कि कुछ कम पसन्द किया जाने वाला
जब तक मैं मरूँगा
मुझे लगता है यह बेहतर हो जाएगा
क्या कोई आशा है कि तुम क़ैद से इन दिनों निकल जाओगे ?
मुझमें एक आवाज़ कहती है :
संभवतः
नाज़िम हिकमत
(अंग्रेज़ी से अनुवाद: उपासना झा)
चित्र: रेनेटो गुट्टूसो, आलिंगन
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