Saturday, 29 August 2020

Lenin -To the Indian Revolutionary Association, CW 31


"1920, में भारतीय क्रांतिकारियों को लिखे अपने पत्र में उन्होंने तब खुद संघर्ष में डूबे समाजवादी रूस (सोवियत संघ का गठन 1922 में हुआ था) के राष्ट्राध्यक्ष के बतौर खुला समर्थन दिया था। उन्होंने लिखा था, "मुझे यह सुनकर प्रसन्नता हुई है कि उत्पीड़ित जातियों के लिए आत्मनिर्णय और विदेशी और देशी पूंजीपतियों के शोषण से मुक्ति के सिद्धांतों को, जिन्हें मजदूर-किसान जनतंत्र ने घोषित किया है, अपनी स्वतंत्रता के लिए वीरतापूर्वक लड़ रहे सचेत हिंदुस्तानियों के बीच इतना हार्दिक स्वागत प्राप्त हुआ है. रूस के मेहनकतश जनसाधारण हिंदुस्तानी मजदूरों और किसानों के जागरण का सतत ध्यानपूर्वक अवलोकन कर रहे हैं. मेहनतकशों का संगठन और अनुशासन, उनका धैर्य और सारे संसार के मेहनतकशों के साथ एकजुटता अंतिम विजय की गारंटी है. हम मुसलमान और गैर मुसलमान तत्वों की घनिष्ठ संघबद्धता का स्वागत करते हैं. हमारी सच्ची कामना है कि यह संघबद्धता पूरब के समस्त मेहनतकशों तक प्रसारित हो. केवल तभी, जब हिंदुस्तानी, चीनी, कोरियाई, जापानी, फारसी, तुर्क मजदूर और किसान कंधे से कंधा मिलायेंगे और मुक्ति के एकसमान ध्येय के हेतु साथ-साथ आगे बढेंगे, केवल तभी शोषकों पर निर्णायक विजय सुनिश्चित होगी." (To the Indian Revolutionary Association, CW 31)

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