Tuesday, 7 June 2022

नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल को पार्टी से निकालना

मार्क्सवाद हमेशा ही सही है 
 अगर किसी को लगता है कि नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल को पार्टी से निकालना भाजपा के हृदय परिवर्तन होने का संकेत है तो वे मुगालते मे हैं।पिछले आठ साल से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ जो नफ़रत का जहर फैलाया जा रहा  है उसके कारण जहां भाजपा को राजनैतिक फायदा हो रहा है वहीं हिंदु समुदाय का बड़ा हिस्सा इस बात से खुश है कि आर्थिक गतिविधियों से मुस्लिम समुदाय को बाहर करने से हिंदु समुदाय को  लाभ है पर अब जब  नुपुर शर्मा के बयान के बाद अरब देशों मे भारतीय सामानों का वहिष्कार होना शुरू हुआ तो हिंदुत्व वाद की हवा निकल गई और नुपुर शर्मा को बाहर का रास्ता दिखा कर अरब देशों के गुस्से को शांत करने की कोशिश की गई क्योंकि मामला जेब का और  पापी पेट का  पहले है,धर्म उसके बाद आता है। कितनी बड़ी विडंबना है कि देश के अंदर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत का अभियान चलाने वालों को मुस्लिम देशों के सामने घुटने टेकने पड़े।
मार्क्सवाद का बुनियादी सिद्धांत ही यही है कि चाहे पारिवारिक संबंध हों या सामाजिक या अन्तरराष्ट्रीय संबंध सभी का ढांचा  आर्थिक संबंधो की बुनियाद पर खडा होता है।संबंधों का superstructure अर्थ के infrastructure पर बनता है।
भाजपा मार्क्सवाद को भले लाख गाली दे और उसे कालातीत सिद्धांत बोलकर लोगो को गुमराह करने मगर वो अच्छे से उसकी शाश्वतता और ताकत को जानती हैऔर ये भी जानती है कि जनता बेरोजगारी ,गरीबी, मंहगाई जैसे सवालों पर सोचने लगेगी और अपने शोषण के खिलाफ उठ खडी होगी उस दिन हिंदु मुस्लिम नफरत के तंबू देखते देखते उखड़ जायेंगे और भाजपा के लिए इससे बड़ा दुस्वप्न नही हो सकता।

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