Tuesday, 1 June 2021

लड़ाई - कविता

#हर लड़ाई को 
पूंजी के मालिकों के खिलाफ मोड़िए
वही पर्दे में बैठकर 
साजिश रच रहे हैं
सरकारों को नचा रहे हैं
सरकारें बना रहे हैं
सरकारें गिरा रहे हैं
जमीनें हड़प रहे हैं 
बस्तियां उजाड़ रहे हैं.
बैंकों की पूंजी उड़ा रहे हैं
रंगभेद का जहर फैला रहे हैं
करोना फैला रहे हैं
ये सड़कों पर मजदूर जो
दूर तक मारे फिर रहे हैं
बच्चे बूढ़ों के साथ जो
भूख से बिलबिला रहे हैं
सब पूंजी का करिश्मा है
पूरी दुनिया को 
उसके मालिक नचा रहे हैं
 *नरेंद्र कुमार*

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