खाते-पीते घर के बच्चों की तरह
मेरा लालन-पालन हुआ
मेरे मां-बाप ने मेरे गले में
एक कालर बांधा और
खूब टहल-खिदमत करते हुए
मुझे पाला-पोसा और बड़ा किया
उन्होंने मुझे ऐसी शिक्षा दी ताकि
मैं दूसरों के ऊपर हुक्म वा रौब
गालिब कर सकूं
लेकिन मैं जब सयाना हुआ
और अपना अड़ोस-पड़ोस देखा तो
अपने खेमे के लोग मुझे कतई नहीं भाये
न मुझे हुक्म देना भाता
न अपनी खिदमत
सो अपने खेमे के लोगों से नाता तोड़कर
मैं तुच्छ श्रेणी के लोगों के बीच जा बैठा।
इस प्रकार
उन्होंने एक विश्वासघाती को पाला-पोसा
अपनी सभी चालें उसे सिखाईं और
उसने वे सारे भेद दुश्मन को जाकर खोल दिए।
हां, मैं उनके भेद खोलकर रख देता हूं
मैं लोगों के बीच जाकर उनकी
ठगी का पर्दाफाश कर देता हूं
मैं पहले ही बता आता हूं
कि आगे क्या होगा, क्याेंकि मैं
उनकी योजनाओं की अन्दरूनी जानकारी रखता हूं।
उनके भ्रष्ट पंडितों की संस्कृत
मैं बदल डालता हूं शब्द-ब-शब्द
आम बोलचाल में और वह
दिखने लगती है साफ-साफ गप्प-गीता।
इंसाफ के तराजुओं पर
वे कैसे डंडी मारते हैं
यह पोल भी मैं खोल देता हूं।
और उनके मुखबिर बता आते हैं उन्हें
कि मैं ऐसे मौकों पर बेदखल लोगों के बीच
बैठता हूं, जब वे बगावत
की योजना बना रहे होते हैं।
उन्होंने मेरे लिए चेतावनी भेजी
और मैंने जो कुछ भी जोड़ा था अपनी मेहनत से
वह छीन लिया
इस पर भी मैं जब बाज न आया
वे मुझे पकड़ने के लिए आए
हालांकि उन्हें मेरे घर पर कुछ भी नहीं मिला
सिवाय उन पर्चों के
जिनमें जनता के खिलाफ
उनकी काली करतूतों का खुलासा था
सो, चटपट उन्होंने मेरे खिलाफ
एक वारंट जारी किया
जिसमें आरोप था कि मैं तुच्छ विचारों का हूं
यानी तुच्छ लोगों के तुच्छ विचार।
मैं जहां कहीं जाता
धनकुबेरों की आंख का कांटा सिद्ध होता,
लेकिन जो खाली हाथ होते
वे मेरे खिलाफ जारी वारंट पढ़कर
मुझे यह कहते हुए
छुपने की जगह देते कि :
''तुम्हें एक अच्छे कारण
के लिए खदेड़ा गया है।''
-बेर्टोल्ट ब्रेष्ट
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