आज 6 दिसम्बर दलितों बुद्धिजिवियों का मुहर्रम है और 14 अप्रैल नीला रंग का रामनवमी होता है !
ब्राह्मण के एक छोटे से हिस्से ने मनुस्मर्ति लिखा जिसका प्रभाव आंशिक रूप से ही था जिसे अम्बेडकर ने लोकप्रिय बनाया ! दुसरा आधुनिक युग का संविधान जो हमारे लिए मनुस्मृति ही है उसे अम्बेडकर ने संवैधानिक रूप से लागु करवाया ! अम्बेडकर तब संविधान सभा में मुस्करा रहे थे जब उन्हें व्यंग के रूप में आधुनिक युग के मनुस्मृति के रचनाकार की उपाधि से नवाजा जा रहा था ।
ब्राह्मणों के मनुस्मृति और अम्बेडकर के द्धारा लिखवाए गए मनुस्मृति दोनों ने हमारे हितों और अधिकारों की अनदेखी की !
दुसरी और ब्राह्मणों के लिखे साहित्य से हमारे जनसमान्य लोग भ्रमित हुए ! लेकिन दलितों के लिखे साहित्य से हम जैसे चेतना संपन्न लोग अपना आत्मविश्वाश खोकर , भ्रमित ही नहीं नफरत और घृणा का भाव लेकर जीने लगे !
अब इनसे निकलने और निकालने का समय आ गया है ।
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