Saturday, 8 August 2020

खुदी राम बोस

आज ही के दिन, 11 अगस्त 1908 में खुदी राम बोस की फाँसी हुई ।   17  साल के इस नौजवान के सर्वोच्च बलिदान ने पुरे अविभाजित बंगाल को इतना झकझोर दिया था कि  बंगाल के गाँव , कस्बे और शहर के मुहल्लों में सन्यासी , वैरागीऔर फकीर  हाथ में एक तारा लिये  खुदीराम की शहादत का एक बहुत मार्मिक गीत  गाते थे घर घर ,
" एक बार बिदाई दे माँ , घूरे आसी ,
हाँसी हांसी  पड्बो फाँसी , देखबे भारत वासी '
( खुदी राम अपनी माँ से आज्ञा ले रहे है कि एक बार मृत्यु से आलिंगन करने मुझे जाने दे । वो कहते है कि सारा देश देखेगा कि जब खुदी राम फाँसी के तख्ते पर था तो हँस रहा था ।

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