हम निजी सम्पत्ति को खत्म कर देना चाहते हैं , इसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन आपके मौजूदा समाज में दस में से नौ आदमियों के लिए निजी सम्पत्ति अभी से ही खत्म हो चुकी है ; चन्द लोगों के पास यदि निजी सम्पत्ति है तो उसका एकमात्र कारण यही है कि दस में नौ आदमियों के पास वह नहीं है। इसलिए ,आप हमारे खिलाफ सम्पत्ति की ऐसी व्यवस्था को खत्म कर देने की इच्छा रखने का जुर्म लगाते हैं जिसके अस्तित्व के लिए जरूरी यह है कि समाज के अधिकांश भाग के पास कोई सम्पत्ति न हो ।
संक्षेप में आपका आरोप यह है कि हम आपकी सम्पत्ति खतम कर देना चाहते हैं। तो यह बिल्कुल ठीक है। हम ठीक यही चीज करना चाहते हैं।
-- कार्ल मार्क्स एवं फ्रेडरिक एंगेल्स
" कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र " दिसम्बर 1847 से जनवरी 1848 में लिखित
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